कोरोना के दौर में रचनात्मक पहल।

Creative masks for children

तेज धूप कारण जहां आदमियों ने पगड़ी या रूमाल से सर और मुँह धक रखे है तो वहीं औरतें लूगडी और घूंघट को मास्क बनाए चेहरे ढके हुए दिखते हैं। परंतु उनके साथ वाले अधिकतर बच्चे बिना मास्क के दिखते हैं जैसे कोरोंना को खुली चुनौती दे रहे हो।

कोरोना वायरस (COVID-19) का संक्रमण सम्पूर्ण विश्व में विकराल रूप लेता जा रहा है जिससे भारत भी अछूता नही है। भारत मे संक्रमित लोगों की संख्या क़रीब एक लाख दस हज़ार के पार हो गई है। दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्तमान में इससे बचाव ही एकमात्र उपाय है। जिसके लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा निरंतर दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

सरकार मास्क, सोशल डिस्टन्सिग और स्वच्छता के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अथक प्रयास में जुटी हैl इनमे मास्क पहनना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

राजस्थान सहित कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानो पर मास्क पहनना बाध्यकारी एवं दंडनीय कर दिया है। घर से बाहर निकलने से पहले मास्क लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हो चुका है ।अब लॉक डाउन के चौथे चरण में राज्य सरकारों के निर्देश के बाद प्रवासी श्रमिक अपने घरों की ओर परिवार और बच्चों के साथ निकल है। भीषण गर्मी मानो सरकार के मास्क पहने जाने के निर्देशों की पालना करते नज़र आती है।

तेज धूप कारण जहां आदमियों ने पगड़ी या रूमाल से सर और मुँह धक रखे है तो वहीं औरतें लूगडी और घूंघट को मास्क बनाए चेहरे ढके हुए दिखते हैं। परंतु उनके साथ वाले अधिकतर बच्चे बिना मास्क के दिखते हैं जैसे कोरोंना को खुली चुनौती दे रहे हो।

बॉर्डर पार कर राजस्थान में प्रवेश करने वाले प्रवासी मजदूरों से जब उनके साथ बिना मास्क के सफ़र कर रहे बच्चों के बारे में पूछा गया, तो खुद के बच्चों के मास्क ना पहनने का जवाब देने की बजाए ग़ुस्साए लहजे में कहा, “क्या कोरोंना सिर्फ़ मेरे बच्चों के मास्क नहीं लगने से फैल रहा है।

मैं भारत फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष, रितेश शर्मा के अनुसार “सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिकांश कानून और निर्देशों को लोगो की भागीदारी प्राप्त नहीं हो पाती। इसका मुख्य कारण उनको रचनात्मक तरीक़े से लागु करने में कमी होना है। कोरोना महामारी के सम्बंध में पारित दिशानिर्देशों को रचनात्मक तरीके से लोगो तक पहुंचना और लोगों को उनके प्रति ज़िम्मेदारी का अहसास करवाना हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए हमारे द्वारा अत्यंत सरल परंतु रचनात्मक तरीक़ों का इस्तेमाल किया जाता हैं।”

मै भारत की क्रीएटिव डायरेक्टर ख़ुशबू शर्मा ने बताया “अडिंग कलर्स टू लाइफ” अर्थात “जीवन में रंगो का साथ” हमारी संस्था का ध्येय वाक्य है । बच्चो को संक्रमण से बचाने और समस्या की गंभीरता को देखते हुए, हमने 50 विभिन्न कार्टून करैक्टर जैसे छोटा भीम, मोगली, बेंटन, बल्लु, टॉम एंड जेरी, मिकी माउस, मिस्टर बीन, जेसमीन आदि के मास्क बनाकर इस समस्या का रचनात्मक समाधान तैयार किया है । बच्चो को पसंदीदा कार्टून करैक्टर के मास्क वितरित किये गए हैं। सूपरहीरो और कार्टून वाले मास्क बच्चो को पसंद आ रहे है । अब बच्चे खुद मास्क लगाने के लिए उत्साहित है और खुश है।

कोरोंना के प्रति आम जन को जागरूक करने, कोरोना वारियर्स को सम्मान देने के लिए संस्था द्वारा ग्रामीण एवं वनवासियों से जागरूकता पोस्टर बनवाये जा रहे है। जिसके लिए आवश्यक सामग्री जैसे शीट्स, कलर आदि संस्था द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है। कोरोना वारियर्स द्वारा कोरोंना से जंग में अमूल्य भागीदारी को समर्पित पोस्टर् विभिन्न गावों सहित शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानो पर लगाए जाएंगे।

संगठन के पदाधिकारी रजनीकांत सोलंकी ने कहा कि “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लोग मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता को समझे । इसके लिए हमने राजस्थान के विभिन्न ग्रीन ज़ोन वाले शहरों में जिसमें सिरोही शामिल है और विभिन्न राजमार्गों पर लोगों को लॉकडाउन के बाद मिली छूट के उचित उपयोग एवम् जागरूक करने के लिए फ़िल्मी डायलोंग ओर संदेश जनित होर्डिंग लगाए गए हैं ।
लॉकडाउन के कारण लोगों के पास स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच आसान नहीं है। इसलिए बच्चों के लिए कार्टून वाले मास्क के अलावा, हमने लोगों को कोरोना के बारे में जागरूक करने के साथ आपातकाल में दिल का दौरा, स्ट्रोक, ट्रॉमा, सीपीआर और अन्य की पहचान करना तथा ऐसी स्तिथि में बरती जाने वाली सावधनिया और विभिन्न कानूनों और सरकार के निर्देशों के संदेश वाले क़रीब 9000 पिक्टोग्राम वाले मास्क भी बनाए है। जो जनता को मुफ़्त उपलब्ध करवाए जा रहे है तथा राहगीरों के साथ आने वाले बच्चों को उपलब्ध करवाने के लिए पुलिस को उपलब्ध करवाए हैं।

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